स्त्री-मन की परतों का चित्रण / नीरज दइया

       राजस्थानी कहानी विकास-यात्रा में बीकानेर के कहानीकारों का विशेष स्थान रहा है। मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ से राजेन्द्र जोशी तक की यात्रा में अनेक पड़ाव देखे जा सकते हैं। राजस्थानी कहाणी को गरिमा देने वाले कहाणीकारों में बीकानेर के श्रीलाल नथमल जोशी, यादवेंद्र शर्मा ‘चन्द्र’, अन्नाराम ‘सुदामा’, मूलचंद ‘प्राणेश’, सांवर दइया, भंवर लाल ‘भ्रमर’, बुलाकी शर्मा, श्रीलाल जोशी, मदन सैनी, मधु आचार्य ‘आशावादी’, नवनीत पाण्डे आदि के नाम उल्लेखनीय है।
       राजेन्द्र जोशी के प्रथम कहानी संग्रह ‘अगाड़ी’ का नामकरण पहली कहानी “अगाड़ी” पर हुआ है। कहानी दहेज पर लिखी सामान्य-सी कहानी प्रतीत होती होगी, किंतु कहाणीकार राजेन्द्र जोशी की कहानी-कला की विशेषता है कि वे नए होते हुए भी पाठ में सहज संवादों और मनस्थितियों को प्रस्तुत करते हुए रोचकता के साथ प्रभाव और अभिप्राय गढ़ते हैं। दहेज नहीं लेने का स्वर यहां बेहद शांत ढंग से पाठ में गूंथा गया है, जो किसी उपदेश की भांति नहीं वरन अव्यक्त के रूप में उभरता है। कहानियों की अभिव्यंजना में उनके कहने-सुनने का स्वर मिलता है। यहां राजस्थानी लोककथाओं का सहज स्मरण होता है।
       राजेन्द्र जोशी की अबै माफी नीं, ममता आदि कुछ कहानियां कतिपय संयोग के स्वरों को साधती है। वहीं इन कहानियों में स्त्री-संधर्ष की अनेक छवियों को सूक्ष्मता से उकेरा गया है। स्त्री अपनी अस्मिता संभालती-संवारती यहां नए सरोकारों के साथ उपस्थित हुई है। कहानी ‘अनाम रिस्तो’ की सुधा के लिव इन रिलेशन से राजस्थानी कहानी में नवीन सूत्रपात होता है, तो ‘ममता’ कहानी अपनी जड़ों और जमीन की तलाश में विवाह-संबंधों में नए सोच का चित्रण है। चर्चित कहानीकार बुलाकी शर्मा के शब्दों में- “अगाड़ी की कहानियों से राजेन्द्र जोशी की पहचान स्त्री-मन के सच्चे-चितेरे के रूप में होगी।”
       समग्र रूप से कहें तो संग्रह की कहानियों का केंद्रीय स्वर अगाड़ी (अग्रिम) होना और अगाड़ी रहना इस रूप में माना जा सकता है कि कहानियों के पात्र प्राचीनता को छोड़कर युग-संदर्भों के साथ नवनीताओं को स्वीकारने के पक्षधर बनकर आधुनिकता को सहजता से अंगीकार करते अपनी विशिष्टता के रूप में रेखांकित किए गए हैं।
- डॉ. नीरज दइया
इस पुस्तक पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।
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पुस्तक : अगाड़ी / कहानीकार : राजेन्द्र जोशी / संस्करण : 2015 / पृष्ठ : 96 / मूल्य : 200/-
प्रकाशक : ऋचा (इण्डिया) पब्लिशर्स, बीकानेर / आवरण : कुंवर रवीन्द्र
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