समाज का अक्स : च्यानण पख / नीरज दइया

          राजस्थानी भाषा के युवा कहानीकार मदनगोपाल लढ़ा के प्रथम कहानी-संकलन “च्यानण पख” में वर्तमान समय और समाज के अक्स को प्रस्तुत करती सत्रह कहानियां संकलित है। डायरी शैली में लिखी शीर्षक-कहानी “च्यानण पख” यानी शुक्ल-पक्ष एक ऐसी लड़की की कहानी है जो समय के साथ समझवान होती जैसे स्त्री-विमर्श को नई राह प्रदान करती है।
          मदन गोपाल लढ़ा की इन कहानियों में राजस्थानी जन-जीवन के उन छोटे-छोटे पक्षों को प्रमाणिकता से उभारने का प्रयास किया गया है, जिन से हम रोजमर्रा की दिनचर्या में अपने घर-परिवार और आस-पास के जीवन में सामना करते हैं। इन कहानियों में विभिन्न कला माध्यमों यथा- चित्रकला, संगीत आदि से जुड़ी स्थानीयता और सर्वकालिकता भी उल्लेखनीय है।
नीरज दइया
इस पुस्तक पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।

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च्यानण पख (राजस्थानी कहानी संग्रह) मदन गोपाल लढ़ा
प्रकाशक- कलासन प्रकाशन, बीकानेर / पृष्ठ-80 / मूल्य- 60/-
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